लंदन : ब्रिटिश सरकार ने एक मानवाधिकार विधेयक लाने की अपनी योजना की घोषणा करते हुए बुधवार को कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संसद की शक्तियों को मजबूत करेगा। हालांकि, कंजरवेटिव सरकार को इस कदम के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

ब्रिटेन और यूरोप की अदालतों ने मानवाधिकारों के आधार पर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की सरकार को ब्रिटेन से लोगों को रवांडा निर्वासित करने से रोक दिया था। उसके बाद सरकार ने यह विधेयक प्रकाशित किया है।

ब्रिटिश संसद यदि यह विधेयक पारित कर देती है तो नया कानून मानवाधिकारों के दावे करने संबंधी प्रावधान और सख्त बना देगा।

यह ब्रिटेन में किसी अपराध में (अदालत द्वारा) दोषी करार दिये गये व्यक्ति के निर्वासन को मानवाधिकार आधार पर चुनौती देने की राह मुश्किल कर देगा। सरकार ने कहा कि उसके इस कदम का मकसद मामूली दावों की संख्या घटाना है।

यह कानून ब्रिटिश अदालतों को यूरोपीय मानवाधिकार अदालत के आदेशों की अनदेखी करने की भी शक्ति देगा, जो वर्तमान में ब्रिटेन सहित दर्जनों देशों के लिए मानवाधिकार कानून का अंतिम मध्यस्थ है।

यूरोपीय मानवाधिकार अदालत ने पिछले हफ्ते एक आदेश में कहा था कि एक इराकी व्यक्ति को सरकार की विवादित निर्वासन योजना के तहत रवांडा नहीं भेजना चाहिए। इस फैसले ने विवाद को बढ़ा दिया।

न्याय मंत्री डोमिनिक राब ने कहा कि विधेयक ब्रिटेन के मानवाधिकार अधिनियम की जगह लेगा और प्रणाली के दुरूपयोग पर रोक लगाएगा।

वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल, ब्रिटेन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी साचा देशमुख ने कहा, ‘‘लोगों से उनके सर्वाधिक प्रभावशाली अधिकार छीने जा रहे हैं। ’’